यूपी इन्वेस्टर समिट : आकाओं को ख़ुश करने के लिए यथार्थ से दूर बयानबाज़ी !

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कुछ उद्योगपतियों ने किसी को ख़ुश करने के लिए गंगा की बात की तो किसी ने बनारस की.

एक नितांत अव्यवस्थित फ़्लॉप मेगा शो….रु. 500 करोड़ के ख़र्चे वाला मेगा शो ‘यूपी इन्वेस्टर्स समिट 2018’ में चुनावी भाषणों ने ख़ूब समा बांधा …. नेता-अधिकारी-बड़े उद्योगपतियों ने भारी आगे की कुर्सियाँ और सामान्य इन्वेस्टर्स को पीछे बिठाया गया और आधों की तो कुर्सियाँ भी नसीब नहीं हुई…… कोई करिश्मा नहीं…. कोई जोश नहीं ….. सब कुछ फीका- फीका सा रहा ….काफ़ी लोग ऊँघ रहे थे बोरिंग भाषणों से…..

खाने पर मारामारी देखते ही बनती थी …..टाटा ने कहा टीसीएस वापिस नहीं जाएगी …. अम्बानी ने अपने जीयो फ़ोन का प्रचार किया ….. अड़ानी ने कहा खाद्यान्न के स्टोर बनाएँगे …. रु. 4.28 लाख करोड़ के MOUs की डिंगे मारी जा रही थी, कहीं नहीं दिखा कोई माहौल …. कुछ कॉरिडर्स के स्थापना की बात कई वर्षों से सुन रहे हैं, बस वही बातें दोहरायी गयी ……. हाँ, कुछ उद्योगपतियों ने किसी को ख़ुश करने के लिए … गंगा की बात की तो किसी ने बनारस की ……

ये समिट कुछ भ्रष्ट नेताओं व अधिकारियों की जेब ज़रूर भरने में कामयाब रहेगी ….. पूर्व सरकार के लाड़ले कई लम्बे-२ भ्रष्ट अधिकारी ख़ूब लाइमलाइट बटोरने की कोशिश कर रहे थे …. सम्बंध बनाने के लिए ठिट्टा-ठिटोली कर रहे थे …..

सच कहता हूँ तो आप कहते हैं कि नेगेटिव बातें लिखता हूँ …… आप स्वमं ही देख लेना कि रु.४.२८ लाख करोड़ की कपोल कल्पित घोषणा के अनुरूप कितना इंवेस्टमेंट आता है …. मेरे भी कुछ परिचित उद्योग से आने वाले लोग थे …. सब इस शो का मज़ाक़ बना रहे थे और कह रहे थे कि दो दिन के काम का हर्ज़ाना आकाओं को ख़ुश करने के लिए उठाना ही पड़ेगा …..पूर्वांचल व बुंदेलखंड में कोई नहीं जाना चाहता, सबको नॉएडा में ज़मीन चाहिए …..उद्योग पॉलिसी तो बनी हैं लेकिन उनके एक्सेक्यूशन की कोई फ़ॉलो उप प्लान ही नहीं हैं ….. सिंगल विंडो सिस्टम ‘निवेश-मित्र’ तो अखिलेश यादव के समय भी लॉंच हुआ था अब इसे प्रधानमंत्री मोदी से पुनः लॉंच कर अपना नया क़दम बताया जा रहा है …..

झूठ और केवल लोगों को मूर्ख बनाने की बातों के सिवाय कुछ भी नहीं था इस समिट में ……..यथार्थ से दूर स्वप्न दिखाने की झूठी बयानबाज़ी ….!

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