नसीमुद्दीन सिद्दीकी व अन्य दागी नेताओ की शरण स्थली बन रही कांग्रेस पार्टी के विचारों से संतुष्ट न होने वाले लखनऊ के वरिष्ठ कांग्रेसी कार्यकर्ता पर किसी भी समय कार्यवाही संभव है।
स्थानीय समाचार पत्रों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर और प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद व अन्य नेताओं को इन सब कामो के प्रति जिम्मेदार बताते हुए राहुल गांधी से जांच कराने की भी अपेक्षा की गई है। कहा गया है कि इन लोगो ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को भी गुमराह किया है। इतना ही नही पत्र का कहना है कि आज़ादी की जंग में योगदान देने वाली कांग्रेस पार्टी की कमान अब जिन लोगो के हाथ में है वे पार्टी को ऊपर उठाने की जगह उसे गिराने का काम कर रहे है। कांग्रेस पार्टी में यदि दागी नेताओ को जगह दी जायेगी तो कांग्रेस का चीरहरण हो जायेगा।
बादशाह सिंह, रिजवान अली और नसीमुद्दीन जैसे लोगो को पार्टी में शामिल कर कांग्रेस नेतृत्व ही कटघरे में खड़ा हो गया है। कोई मनी लॉन्ड्रिंग में तो कोई भ्रष्टाचार की जांच से जूझ रहा है। मायावती के काल मे दूसरे मुख्य मंत्री ख़्य जाने वाले नसिंमुद्दीन कि बात करे तो बसपा सरकार में 12 विभागों का चार्ज रखने वाले इस मंत्री को मुख्य मंत्री की नाक का बाल कहा जाता था। पैसे के लेन देन या टिकट बटवारे को लेकर हुई अनबन के चलते उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता देखना पड़ा। बादशाह खान, मुकेश श्रीवास्तव व अन्य कुछ और ऐसे ही लोगो को पार्टी की सदस्यता दिलाने से वरिष्ठ जांग्रेसी नेता संजय दीक्षित ने भी आपत्ति दर्ज कराई थी।
मनरेगा घोटालो की जांच की शिकायत को लेकर चर्चित संजय दीक्षित से ऐसे नेता हमेशा दूरी बनाये रहते है जो किसी गड़बड़ घोटाले में लिप्त रहे हो। बताते है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के शीर्ष नेताओं को भी संजय दीक्षित सुहाते नही है। शीर्ष नेता शीर्ष स्तर से संजय दीक्षित के विरुद्ध कार्यवाही करा सकते है, इसकी भी संभावना वरिष्ठ कांग्रेसी नेता द्वारा व्यक्त की गई है।
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