बजट से नाराज NDA के अपने, विपक्ष के साथ गांधी मूर्ति पर प्रदर्शन

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मोदी सरकार ने 2019 लोकसभा चुनाव से पहले अपना आखिरी पूर्ण बजट पेश कर दिया है. लेकिन बजट को लेकर मोदी सरकार विपक्ष के साथ-साथ अपने साथियों का विरोध भी झेल रही है. विपक्षी पार्टियां तो बजट को बेकार बता ही रही हैं तेलुगू देशम पार्टी भी सरकार से बजट को लेकर खासी नाराज है. मंगलवार को टीडीपी ने विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर संसद के बाहर स्थित गांधी मूर्ति पर प्रदर्शन किया.

मंगलवार को संसद शुरू होने से पहले ही तेलुगू देशम पार्टी के सांसदों ने संसद की सीढ़ियों पर प्रदर्शन किया और नारे लगाए. इन सांसदों का आरोप है कि आंध्र प्रदेश के बंटवारे के समय राज्य को जो वायदे किए गए थे वह पूरे नहीं किए गए हैं. उन्होंने कहा कि तेलंगाना राज्य के गठन के समय आंध्र प्रदेश को बंटवारे की वजह से हुए नुकसान की भरपाई के लिए जिस पैकेज का ऐलान किया गया था वह अभी तक नहीं मिला है और बजट में भी इस मामले में उन्हें मायूसी हुई है.

टीडीपी के सांसदों ने लोकसभा में भी जोरदार तरीके से यह मुद्दा उठाया और संसद की कार्यवाही शुरू होते ही उनके विरोध प्रदर्शन की वजह से कार्रवाई को लिए स्थगित करना पड़ा. तेलुगू देशम पार्टी वैसे तो एनडीए में है लेकिन बीजेपी के साथ उसके संबंध लगातार खराब होते जा रहे हैं और माना जा रहा है कि देर सबेर वह बीजेपी से नाता तोड़ लेगी.

टीएमसी भी साथ

उधर तृणमूल कांग्रेस ने भी मंगलवार को संसद में गांधी प्रतिमा के सामने बजट के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने अपने हाथ में जो पोस्टर लिए हुए थे उसमें यह बताया गया था कि कैसे लगातार कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बावजूद सरकार इसका फायदा आम लोगों तक नहीं पहुंचा रही है तथा पेट्रोल और डीजल सस्ते होने के बजाय लगातार महंगे होते जा रहे हैं. ममता बनर्जी पहले ही कह चुकी है कि यह बजट आम लोगों के खिलाफ है.

तृणमूल कांग्रेस के सांसदों का यह भी आरोप था कि स्कूली बच्चों को मुफ्त खाना देने के लिए मिड-डे मील स्कीम में आवंटन कम कर दिया गया है जबकि तृणमूल कांग्रेस की यह मांग की कि इसमें आवंटन बढ़ाया जाए.

तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने कहा कि वह संसद में भी इस मामले को उठाएंगे और लोगों को बताएंगे की सरकार तेल का खेल कैसे कर रही है. तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि अगर यही अच्छे दिन थे तो लोगों को ऐसे अच्छे दिन नहीं चाहिए.

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