संस्कृत नाटक उरूभंगम का किया मंचन

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देहरादून । उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के तत्वावधान में संस्कृत नाट्य यात्रा के अंतर्गत संस्कृत नाटक उरूभंगम का मंचन किया गया और इसके बाद यात्रा को रवाना किया गया। हिन्दी भवन में उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के तत्वावधान में संस्कृत नाटय यात्रा के अंतर्गत संस्कृत नाटक उरूभंगम का मंचन किया गया और इसके बाद यात्रा को रवाना किया गया।
इस अवसर पर नाटक में आरंभ में कलाकारों ने भाटों द्वारा युद्धभूमि की विभीषिका का वर्णन किया और युद्धभूमि में कहीं रक्त की नदियां बह रही है तो कहीं महावत के बिना हाथी इधर उधर घूम रहे है तो कहीं घोडे खाली रथ को खींच रहे है। गिद्ध के झुण्ड मांस के टुकडों के लिए आकाश में उड़ रहे है और भाट दुर्योधन और भीम के मध्य सदा युद्ध का आंखों देखा वर्णन प्रस्तुत करते है।
इस दौरान दोनों में भीषण युद्ध होता है और आरंभ में दुर्योधन भीम पर भारी पडता है, यह देखकर युधिष्ठिर दुखी हो जाते है और अर्जुन गाण्डीव हाथ में लेते है और श्रीकृष्ण आकाश की ओर देखने लगते है, तभी श्रीृष्ण भीम को गुप्ता संकेत देकर दुर्योधन की जंघा पर प्रहार करने के लिए इशारा करते है। भीम जोश में उठकर दुर्योधन की जंघा पर प्रहार करता है और दुर्योधन धराशायी हो जाता है। यह  देखकर बलदेव व अश्वत्थामा को क्रोध आता है और वह पांडवों से बदला देने की बात करते है परन्तु दुर्योधन उन्हें शांत कर देता है। इसी बीच धृतराष्ट्र, गधारी, दो रानियां तथा दुर्जय प्रवेश करते है और दुर्योधन की दशा देखकर विलाप करने लगते है। दुर्योधन अपने पुत्र दुर्जय से कहता है कि वह पांडवों को उसी तरह सम्मान दे और द्रोपदी व अभिमन्यु की माता को अपनी माता समझे, दुर्योधन यह कहकर वीरगति को प्राप्त हो जाता है और युधिष्ठिर के राज्याभिषेक के साथ ही नाटक का सुखांत होता है। नाटक मंे कलाकारों ने जीवंत अभिनय दिखाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। नाटक के निर्देशक डा. अजीत एवं सहायक निर्देशक दिनेश भटट ने किया। इस अवसर पर अकादमी के सचिव व मुख्य संयोजक गिरधर सिंह भाकुनी ने बताया कि यह यात्रा परमार्थ निकेतन, नई टिहरी, रूद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग चमोली, काशीपुर, हरिद्वार तक जायेगी और जगह जगह नाटक का मंचन किया जायेगा। इस अवसर पर नवीन नैथानी आदि मौजूद थे।

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