68वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में दिखाई जाने वाली एकमात्र भारतीय फिल्म में है क्या खास, जानिए

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नैनीताल निवासी त्रिमाला अधिकारी ने बॉलीवुड के अपने कुछ ही वर्षों के सफर में विशेष पहचान बनाने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ख्याति बटोरी है।

चर्चित और सराही जा रही भारतीय फिल्म गारबेज में त्रिमाला ने मुख्य भूमिका निभाई है। उन्हें जर्मनी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भरपूर सराहना मिली है। बिना फिल्मी पृष्ठभूमि और बिना किसी गॉड फादर के त्रिमाला ने अपना मुकाम खुद बनाया है।

कौशिक मुखर्जी क्यू द्वारा निर्देशित गारबेज फिल्म इस वर्ष जर्मनी में आयोजित 68वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव बर्लिनाले पैनोरमा में प्रदर्शित होने वाली अकेली भारतीय फिल्म है। ऑड जाइंट फिल्म एंड कर्मा मीडिया इंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी इस फिल्म में त्रिमाला ने रामी नाम के पात्र का अभिनय किया है।

फिल्म के अन्य कलाकारों में तन्मय धनानिया और सतरूप दास हैं। भारतीय समाज के एक विकृत पहलू पर आधारित यह फिल्म बेहद चर्चित होने के साथ ही अपनी कथावस्तु को लेकर विवाद भी बटोर रही है। इसके निर्देशक कौशिक का दावा है कि यह फिल्म भारत में प्रदर्शित की गई तो लोग थियेटर में आग लगा देंगे।

त्रिमाला अनेक चर्चित फिल्मों में महत्वपूर्ण किरदार निभा चुकी हैं जिनमें हरामखोर, संयोग, भस्मासुर, अगली बार, हंसा, हूप डायरीज आदि शामिल हैं। त्रिमाला द्वारा अभिनीत फिल्म आफ्टरनून क्राउड भी कांस फिल्म महोत्सव में सराही जा चुकी है।

त्रिमाला के पिता श्याम सिंह अधिकारी केएमवीएन से सेवानिवृत्त हो चुके हैं जबकि माता करुणा अधिकारी भी निगम में कार्यरत हैं। कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुए नैनीताल निवासी मेजर राजेश अधिकारी त्रिमाला के चाचा थे जबकि बहन अत्री उत्तराखंड हाइकोर्ट में अधिवक्ता हैं।

नैनीताल से की है स्कूली शिक्षा
त्रिमाला ने वर्ष 2007 में सेंट मेरी कॉन्वेंट स्कूल नैनीताल से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, इसके बाद वह दिल्ली में श्री राम कला केंद्र से जुड़ गई। बाद में मुंबई जाकर थियेटर, फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। थियेटर के क्षेत्र में भी बतौर अभिनेत्री, निर्देशक उसने अच्छा मुकाम हासिल किया है।

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