खुलासा- प्रद्युम्न मर्डर केस में पुलिस ने सबूतों से की थी छेड़छाड़, पुलिस पर गंभीर आरोप- सूत्र

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देश के सबसे चर्चित रहे मर्डर केस प्रद्युम्न हत्याकांड में सीबीआई ने अपनी जांच में हरियाणा पुलिस को ही कटघरे में खड़ा कर दिया।

नई दिल्ली- देश के सबसे चर्चित रहे मर्डर केस प्रद्युम्न हत्याकांड में सीबीआई ने अपनी जांच में हरियाणा पुलिस को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। सीबीआई ने जांच में बताया कि हरियाणा पुलिस ने सात साल के मासूम के मर्डर केस में हत्या के हथियार चाकू को बरामद कर, स्कूल के बस कंडक्टर को आरोपी साबित कर मामले को घंटों में ही हल कर दिया।

वहीं सीबीआई की दो महीने की लंबी जांच में चौंका देने वाला खुलासा सामने आया कि रेयान स्कूल का ही एक 16 साल के एक छात्र को इस अपराध के सिलसिले में हिरासत में लिया गया। ”छात्र ने स्कूल के पास की ही एक दुकान से चाकू खरीदा और बैग में रख उसे स्कूल के अंदर ले गया। एक सीबीआई अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू को एक ही बरामद हुआ है जो आरोपी छात्र के पास था। जबकि हरियाणा पुलिस ने कंड़क्टर के पास से भी चाकू बरामद होने की बात कही, जबकि इस बात का तो कोई आधार ही नहीं है। ऐसे में कंडक्टर को आरोपी कैसे माना जा सकता है।”

उन्होंने आगे बताया कि, छात्र ने सीबीआई टीम को उस दुकान को भी बताया जहां से उसने चाकू खरीदा था। इतना ही नहीं उसने अपने पिता और सीबीआई के कल्याणकारी अधिकारी के सामने भी अपना गुनाह कबूल किया।

आरोपी छात्र ने बताया कि, कैसे उसने कुछ ही सेकेंड के अंदर प्रद्युम्न का गला रेत दिया और उसे टॉयलेट में ही  छोड़कर बाहर आ गया। उसने ये भी बताया कि प्रद्युम्न को इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि उसके साथ ऐसा भी कुछ होने वाला है इसलिए वह खुद को बचाने की कोशिश ही नहीं कर पाया।

यहीं कबूलनामा हरियाणा पुलिस के सभी सबूतों को ध्वस्त कर देता है जो उसने प्रद्युम्न मर्डर केस में जुटाए थे। उन्होंने कहा कि हरियाणा पुलिस की थ्योरी है कि प्रद्युम्न का मर्डर कंडक्टर अशोक ने किया है। पुलिस ने तर्क दिया कि बस की टूल बॉक्स से अशोक चाकू लेकर गया। स्थानीय पुलिस का दावा है कि अशोक ने सात साल के मासूम पर यौन हमला भी किया। जिसके बाद उसने चाकू से उसका गला रेत दिया। पुलिस ने अपना पक्ष सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए अपना पक्ष मजबूत कर लिया। क्योंकि सीसीटीवी फुटेज में अशोक टॉयलेट से बाहर आता दिख रहा है।

सीबीआई सूत्रों का दावा है कि इस पूरे प्रकरण में केवल एक ही चाकू बरामद किया गया। वास्तव में एक मात्र चाकू शौचालय के कमोड से बरामद किया गया था जहां यह किशोर द्वारा फेंका गया था। जिसने कथित रुप से पीटीएम को टालने के लिए किया था। और वास्तव में मर्डर के बाद स्कूल कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया था।

सबसे बड़ी बात यह है कि हरियाणा पुलिस इस बात पर चुप्पी साधे रही कि चाकू कहां से बरामद किया गया। सीबीआई की जांच में सूत्रों ने दावा किया कि अशोक से चाकू की कथित वसूली एक क्रूड फ्रेम का हिस्सा थी, जिसका पुलिस ने कथित रूप से सहारा लिया था क्योंकि उस समय पुलिस पर काफी दबाव था क्योंकि लोग यह जानना चाहते थे कि आखिर सात साल के मासूम की हत्या किसने की। गुड़गांव पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की वसूली का हवाला देते हुए वॉशरूम से बाहर निकलते हुए अशोक को ही दोषी करार कर दिया। और उसने इस मामले को उसी दिन हल कर दिया।

जिसके बाद सीबीआई को इस मामले में स्थानीय पुलिस जांच की में कई कमियां मिली। आम तौर पर यह संबंधित विभाग और अदालत को इसके बारे में सूचित करता है। सीबीआई ने आधिकारिक तौर पर यह कहने से मना कर दिया है कि क्या अशोक को क्लीन चिट दी गई है या नहीं, सूत्रों ने बताया कि, “उनके खिलाफ उसके पास कुछ नहीं है।”

सीबीआई का दावा है कि छात्र के परिवार वालों ने ही केस को विवादित किया है। सूत्रों का कहना है कि एजेंसी के निष्कर्षों की वजह से अशोक कुमार को कथित तौर पर गिरफ्तार किया गया। और गुमराह किया जा रहा है। जबकि “सभी परिस्थितियां, साक्ष्य और गवाहों के बयान, सीसीटीवी और तकनीकी आंकड़ों के विश्लेषण से छात्र ही घेरे में आता है।”

सूत्रों का कहना है कि, आरोपी छात्र के कपड़े भेज, स्कूल ड्रेस, चाकू और अन्य वस्तुओं को जल्द ही डीएनए टेस्ट के लिए भेजा जा सकता है।” सीबीआई ने अपनी जांच में 125 टीजर, स्टूडेंस और कर्मचारियों को भी जांच में शामिल किया था।

हालांकि सूत्रों ने आगे की जानकारी देने से इंकार कर दिया कि उनकी जांच के परिणामों से क्या होगा। सीबीआई अधिकारी ने बताया कि, ”गुड़गांव पुलिस ने ऐसा क्यों किया। इसके हमारे पास मजबूत प्रमाण है कि यह दिखाने के लिए कि उस किशोर ने ही उस दिन प्रद्युम्न को मारा था, हम उचित समय आने पर किशोर न्याय बोर्ड के सामने यह सबूत पेश करेंगे।”

गुड़गांव के पुलिस आयुक्त संदीप खिरवार ने  पुलिस का बचाव करते हुए कहा कि, हमारी सीबीआई के निष्कर्ष पर पूर्ण सहमति नहीं है। और जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है तो कुछ भी कहना जल्दी होगी।

जब मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था । यह सवाल पूछने पर कि अशोक कुमार को क्यों गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई के साथ डीआईजी के रूप में सेवा करने वाले खिरवार ने कहा कि पुलिस जांच के दौरान सभी तार्किक कदम उठा रही थी।  क्यों गुड़गांव पुलिस ने किशोर की जांच नहीं की, जिसे सीबीआई ने “प्रमुख संदिग्ध” कहा था, खिरवार ने कहा, “जांच एक समय लेने वाली प्रक्रिया है और इस घटना को 12-13 दिनों के बाद एजेंसी द्वारा लिया गया था।”

हत्या के एक दिन बाद खिरवार भारत लौटे थे। विशेष जांच दल की अध्यक्षता वाली डीसीपी अशोक बक्षी और डीसीपी (अपराध) सुमित कुहर हत्या के दृश्य पर मौजूद थे। पूछे जाने पर कि क्या कुमार की गिरफ्तारी हुई, बक्शी ने जवाब देने से इनकार कर दिया। कुहर ने कहा कि “जांच डीसीपी बक्षी के अधीन थी”

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