यहां मंदिर के पास खुदाई चल रही थी। लेकिन एक ऐसी चीज निकल आई जिसे देखकर सबके होश उड़ गए।
विश्वनाथ मंदिर से कुछ दूरी पर खुदाई के दौरान प्राचीन कुंड मिला है, जिसमें काफी मात्रा में पानी का स्राव हो रहा है। कुंड के भीतर और बाहर लगे पत्थरों की बनावट व खंभे भी दशकों पुराने हैं। बीकेटीसी के कार्याधिकारी अनिल शर्मा का कहना है कि कुंड का निरीक्षण कर पुरातत्व विभाग की टीम को बुलाया जाएगा। कुंड की सुरक्षा व संरक्षण के जरूरी इंतजाम किए जाएंगे।
लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों द्वारा दो दिन पूर्व मंदिर के पीछे की तरफ उत्तर-पश्चिम दिशा में करीब 50 मीटर दूरी पर पेयजल लाइन की मरम्मत के लिए खुदाई की जा रही थी। करीब दो फीट खुदाई के दौरान मजदूरों को जमीन से काफी मात्रा में पानी निकलता दिखा, जिस पर उन्होंने पुन: खुदाई की।
पांच फीट खुदाई के बाद पाया कि वहां करीब तीन फीट चौड़ा व इतनी ही लंबाई का एक प्राचीन कुंड मौजूद है। कुंड के चारों तरफ कटवा पत्थर बिछे हुए हैं और प्रवेश द्वार भी पत्थर का बना हुआ मिला। कुंड के तल से करीब दो इंच पानी का नियमित स्राव हो रहा है। सूचना पर ग्राम प्रधान सहित क्षेत्र के लोग भी मौके पर पहुंचे। सभी ने कुंड व चारों तरफ लगे पत्थरों की साफ-सफाई की।
लोनिवि के कर्मचारी बीरेंद्र तिवारी ने बताया कि जमीन से पांच फीट नीचे यह कुंड मिला है। इस स्थान पर पहले से ही बारहों महीने काफी नमी रहती थी, लेकिन किसी के भी मन में यहां पर पानी का स्रोत या कुंड को लेकर कोई विचार कभी नहीं आया।
ग्राम प्रधान मदन अग्रवाल व पूर्व प्रमुख ममता नौटियाल ने बताया कि कुंड की बनावट और उस पर लगे पत्थरों को देख कर लगता है कि इसका निर्माण सौ वर्ष से भी अधिक समय पूर्व हुआ होगा। उन्होंने श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और प्रशासन से कुंड को धरोहर के रूप में संरक्षित करने की मांग की है।