उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मोदी सरकार के आखिरी पूर्ण बजट निराशाजनक करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस बजट में किसानों के कर्ज माफी संबंधी कोई बात नहीं है।
उन्होंने किसानों की फसल के डेढ़ गुना डैम दिलाने पर भी उठाए सवाल। कहां कि तात्कालिक लाभ नहीं मिलेगा। बेरोजगारों को नौकरियों के सपने दिखाए, लेकिन केंद्र सरकार ने रिक्त 9 लाख नौकरियां खत्म कर दी। उन्होंने ईपीएफ योजना की घोषणा को भी सिर्फ लुभावना बताया। जब नौकरियां ही नहीं है तो ये लाभ किसको मिलेगा।
रावत ने कहा कि उत्तराखंड को उत्तर पूर्वी और जम्मू-कश्मीर जैसे हिमालय राज्यों से बाहर कर दिया गया। राज्य के लिए कोई घोषणा नहीं की गई। ग्रीन बोनस और पलायन से जुड़े ज्वलंत सवाल पर बजट पूरी तरह खामोश हैं।
वहीं उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने केन्द्रीय आम बजट को दिशाहीन, प्रतिगामी, विकास अवरोधी तथा आम आदमी के हितों के खिलाफ मंहगाई बढ़ाने वाला बजट बताया है। कहा कि केन्द्र सरकार ने अपनी हठधर्मिता का परिचय देते हुए जो आम बजट प्रस्तुत किया है वह दिशाहीन, प्रतिगामी, विकास विरोधी, बेरोजगारी व मंहगाई बढ़ाने वाला तथा देश की आर्थिक वृद्धि पर चोट पहुंचाने वाला है।
देश के वित्त मंत्री ने बजट में आंकडों की बाजीगरी कर घुमाकर नाक पकड़ने का काम किया है। इस बजट से मंहगाई बढ़ने के साथ ही आम आदमी के सिर पर बोझ बढे़गा। उन्होंने कहा कि बजट के प्रावधानों से विकास दर दहाई का आंकडा भी नहीं छू पायेगी और न ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
प्रीतम सिंह ने कहा कि आम बजट में मात्र घोषणाओं का अंबार लगाया गया है। जीएसटी के नुकसान की भरपाई तथा आम जनता को मंहगाई से निजात दिलाने के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। बजट में नौजवानों के भविष्य की घोर उपेक्षा की गई है। आम बजट से देश में रोजगार के अवसर घटेंगे, गरीब व आम आदमी के लिए इस बजट में कुछ भी नहीं है।
नोटबंदी और जीएसटी से देश में कई हजार लघु उद्योग बन्द हुए, रीयल स्टेट सेक्टर में काम पूरी तरह से ठप्प हुआ तथा किसानों को उनकी उत्पाद लागत न मिलने के कारण कृषि क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर न्यूनतम हुए हैं। इस प्रकार इन तीनों क्षेत्र में लगभग 6 करोड़ से अधिक लोग बेरोजगार हुए हैं। वित मंत्री ने अपने इस बजट के साथ-साथ पिछले वर्षों के बजट में नये रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए कोई प्रावधान नहीं किया और इस वित्तीय वर्ष में बेरोजगार हुए करोड़ों लोगों की पुर्नबहाली के लिए भी कोई प्रावधान नहीं किया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने केन्द्रीय बजट को पूंजीपतियेां को लाभ पहुंचाने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स छूट के किसी भी स्लैब मे कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है जिससे कर्मचारियों को टैक्स छूट के रूप में कोई भी लाभ नहीं मिल पायेगा। उन्होंने कहा कि बजट मे मंहगाई कम करने के उपाय करने की बजाय सरकारी कम्पनियों में सरकारी भागीदारी कम करते हुए उन्हें पूंजीपतियों के हाथों में सौंपने की योजना बनाई गई है। महिलाओं के लिए इस बजट में कोई विशेष प्रावधान नजर नहीं आता है। महिलाओं के सशक्तीकरण एवं सम्मान की बात केवल पीएम मोदी के लच्छेदार भाषणों का हिस्सा मात्र है। आत्म हत्या के लिए मजबूर हो रहे किसानों के लिए बजट में किसी प्रकार की राहत नहीं दी गई है।