श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कालेज श्रीनगर के सख्त रवैये को देखते हुए प्रशिक्षु (इंटर्न) डॉक्टर बृहस्पतिवार से काम पर लौट आए हैं। इंटर्न के लौटने से कालेज से संबद्ध बेस अस्पताल में सीनियर डॉक्टर्स को राहत मिली है।
बता दें कि इंटर्न को चार माह से मानदेय न मिलने, जूनियर रेजीडेंट (जेआर) की वेतन विसंगति दूर न होने और अवैध रुप से विद्युत उपकरण प्रयोग करने पर कॉलेज प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई से नाराज मेडिकल कालेज के जूनियर रेजीडेंट और प्रशिक्षु डॉक्टरों ने 24 जनवरी से ओपीडी (वाह्य कालीन रोगी विभाग) का बहिष्कार कर दिया था। कालेज प्रशासन की ओर से लगभग सभी मांगों पर कार्रवाई करने के बाद भी जब वह नहीं माने, तो 27 जनवरी को कॉलेज ने आंदोलनरत जेआर को रिलीव कर दिया।
इंटर्न से काम पर लौटने के लिए कहा गया था, लेकिन तीन माह का मानदेय बैंक खाते में आने के बावजूद इंटर्न काम पर नहीं लौटे। इससे कॉलेज प्रशासन सख्ती के मूड में आ गया। उसने साफ कर दिया था कि आठ फरवरी को एमबीबीएस फाइनल प्रोफेशनल परीक्षा संपन्न होनी है। इसके बाद संबंधित 90 छात्र-छात्राओं को अस्पताल में इंटर्न के रुप में तैनाती दी जाएगी। इसके अलावा यह भी बताया गया कि इंटर्न के काम पर न लौटने की स्थिति में भविष्य में उनको सरकारी नौकरी मिलना मुश्किल हो जाएगा। भविष्य को देखते हुए इंटर्न बृहस्पतिवार से काम पर लौट आए। कालेज के इंटर्न कोआर्डिनेटर प्रो. अमित सिंह ने बताया कि एक फरवरी की सुबह इंटर्न ने ड्यूटी पर लौटने की बात कही, जिस पर उनको ड्यूटी पर जाने को कह दिया गया।
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इंटर्न काम पर लौट आए हैं। अस्पताल में सेवाएं सुचारु चल रहीे हैं। अब इंटर्न की भी बायोमीट्रिक हाजिरी होगी।
– प्रो. रविंद्र सिंह, प्रभारी प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर