मुनिकीरेती।
परमार्थ निकेतन में सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग राजस्थान के इंजीनियरों और दिल्ली से आए अधिकारियों की कार्यशाला हुई। जिसमें विशेषज्ञों ने स्वच्छता और वाटर सैनिटेशन और हाइजीन की जानकारी दी गई।
शुक्रवार को आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि किस तरह से धार्मिक संगठन, विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु और धार्मिक संस्थाएं समाज के लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित कर सकती हैं। एनसीजीजी के कार्यक्रम निदेशक डा. बीएस बिष्ट के निर्देशन में कार्यशाला में शामिल हुए इंजीनियरों के दल ने स्वच्छता के लिए प्रेरित और प्रभावित करने और समाज में स्वच्छता की स्थिति को बेहतर करने के गुर सीखे। आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने कहा कि शिक्षा व योग्यता के अनुसार नदियों, पर्यावरण और जल के संरक्षण का कार्य करना होगा।
इस अवसर पर अभियंता संजीव शर्मा, डा. दिव्यांग त्यागी, रामकेश मीणा, करिश्मा बेरवाल, राजेंद्र लोहड़ा, पवन अग्रवाल, संजीव शर्मा, भगवान साय जाजू, अंकुर मित्तल, हरीश वर्मा, केदार वर्मा, देवेंद्र कोठारी, विजय सिंघल, कर्णीप्रताप, भरत सिंह, हिमांशु गोविल आदि मौजूद थे।
परमार्थ निकेतन में सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग राजस्थान के इंजीनियरों और दिल्ली से आए अधिकारियों की कार्यशाला हुई। जिसमें विशेषज्ञों ने स्वच्छता और वाटर सैनिटेशन और हाइजीन की जानकारी दी गई।
शुक्रवार को आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि किस तरह से धार्मिक संगठन, विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु और धार्मिक संस्थाएं समाज के लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित कर सकती हैं। एनसीजीजी के कार्यक्रम निदेशक डा. बीएस बिष्ट के निर्देशन में कार्यशाला में शामिल हुए इंजीनियरों के दल ने स्वच्छता के लिए प्रेरित और प्रभावित करने और समाज में स्वच्छता की स्थिति को बेहतर करने के गुर सीखे। आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने कहा कि शिक्षा व योग्यता के अनुसार नदियों, पर्यावरण और जल के संरक्षण का कार्य करना होगा।
इस अवसर पर अभियंता संजीव शर्मा, डा. दिव्यांग त्यागी, रामकेश मीणा, करिश्मा बेरवाल, राजेंद्र लोहड़ा, पवन अग्रवाल, संजीव शर्मा, भगवान साय जाजू, अंकुर मित्तल, हरीश वर्मा, केदार वर्मा, देवेंद्र कोठारी, विजय सिंघल, कर्णीप्रताप, भरत सिंह, हिमांशु गोविल आदि मौजूद थे।