नैनीताल : नंदा-सुनंदा की भक्ति में सराबोर हुआ नैनीताल, मुख्यमंत्री धामी ने की प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना | विकास भी और विरासत भी” के मंत्र के साथ देवभूमि को आगे बढ़ा रही सरकारः मुख्यमंत्री

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स्थान। नैनीताल।

रिपोर्ट। ललित जोशी


नैनीताल, । सरोवर नगरी नैनीताल में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आयोजित माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने माँ नंदा-सुनंदा के श्रीचरणों में नमन कर प्रदेशवासियों की सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। उन्होंने महोत्सव में उपस्थित माताओं-बहनों, वरिष्ठजनों, युवाओं एवं बच्चों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि माँ नंदा-सुनंदा की छत्रछाया में उपस्थित होना उनके लिए परम सौभाग्य की बात है। मंगलवार के अवसर पर उन्होंने पवनपुत्र हनुमान जी को भी नमन किया और कहा कि जिस प्रकार हनुमान जी ने माता सीता का संदेश प्रभु श्रीराम तक पहुंचाया, उसी प्रकार वे सभी का प्रणाम प्रभु श्रीराम के चरणों तक पहुंचाएं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह के साथ “जय श्रीराम” का जयघोष भी किया।

नंदा देवी महोत्सव हमारी आस्था, संस्कृति और परंपराओं का उत्सवः मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि नैनीताल का नंदा देवी महोत्सव कोई सामान्य मेला अथवा उत्सव नहीं है। यह हमारी आस्था, उत्तराखंड की संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का उत्सव है। माँ नंदा-सुनंदा के स्वागत की परंपरा, लोकगीत, झोड़ा-चांचरी, ढोल-दमाऊं सहित लोक संस्कृति की विविध परंपराएं इस महोत्सव के माध्यम से जीवंत होती हैं।
उन्होंने कहा कि जिस समाज को अपनी जड़ों और अपनी संस्कृति पर गर्व होता है, वही समाज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है।
नैनीताल केवल पर्यटन नगरी नहीं, आस्था और अध्यात्म की भी भूमि
मुख्यमंत्री ने कहा कि नैनीताल को दुनिया उसकी खूबसूरत झील, पहाड़ों और हरी-भरी वादियों के लिए जानती है, लेकिन नैनीताल केवल पर्यटन नगरी नहीं है। यह आस्था और अध्यात्म की भी भूमि है।
उन्होंने कहा कि यहां माँ नैना देवी का पावन धाम है, हनुमानगढ़ी में बजरंगबली विराजमान हैं, कैंची धाम बाबा नीब करौरी महाराज की तपोभूमि है और मुक्तेश्वर में देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद है। प्रकृति और अध्यात्म का यह अद्भुत संगम नैनीताल को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।

देश में धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को मिल रही नई पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश में प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संवारने का कार्य हो रहा है। अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक तथा केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में हुए विकास कार्यों ने आस्था के प्रमुख केंद्रों को नई पहचान दी है।
उन्होंने कहा कि इसी भावना के साथ उत्तराखंड सरकार भी “विकास भी और विरासत भी” के मंत्र के साथ देवभूमि को आगे बढ़ा रही है।

मानसखंड मंदिर माला मिशन से कुमाऊं के धार्मिक स्थलों का कायाकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारखंड की तरह कुमाऊं में भी मानसखंड मंदिर माला मिशन के माध्यम से प्रमुख पौराणिक एवं धार्मिक स्थलों को संवारने का कार्य किया जा रहा है। इसका उद्देश्य धार्मिक स्थलों का विकास करते हुए श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और हमारी प्राचीन विरासत के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखना है।
उन्होंने कहा कि माँ नैना देवी, कैंची धाम, मुक्तेश्वर सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी।

धार्मिक पर्यटन बढ़ेगा तो युवाओं और स्थानीय लोगों के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए संकल्पित है। धार्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे, मातृशक्ति को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेगा और उत्तराखंड की संस्कृति देश-दुनिया तक पहुंचेगी।

नैनीताल के समग्र विकास के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और कनेक्टिविटी पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक विकास के साथ नैनीताल जनपद के समग्र विकास के लिए भी सरकार निरंतर कार्य कर रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पर्यटन और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए विभिन्न योजनाओं एवं परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पहाड़ में रहने वाले व्यक्ति को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा, अच्छी शिक्षा और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए अनावश्यक रूप से दूर न जा…

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