सरकार ने कोरोनरी स्टेंट की कीमत में संशोधन किया।

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 सरकार ने कोरोनरी स्टेंट की कीमत को 85% तक कम किए जाने के लगभग एक साल बाद आज इसकी कीमत में संशोधन किया। इसी के साथ दवा छोड़ने वाले स्टेंट की कीमत में भी बदलाव किया गया है।

दवा मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने एक अधिसूचना में बताया कि धातु के बने कोरोनरी स्टेंट की कीमत को 7,400 रुपए से बढ़ाकर 7,660 रुपए किया गया है। वहीं दवा छोड़ने वाले स्टेंट की कीमत को 30,180 रुपए से घटाकर 27,890 रुपए किया गया है।

प्राधिकरण के अनुसार बदली हुई कीमतें मंगलवार से प्रभावी होंगी और यह पुराने स्टॉक में पड़े स्टेंट पर भी लागू होंगी। उल्लेखनीय है कि कोरोनरी स्टेंट हृदय को खून पहुंचाने वाली धमनियों में वसा के जमाव को हटाकर जगह बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। पहले अस्पताल स्टेंट की मनमानी कीमत वसूलते थे। इसके बाद सरकार ने नियम बनाकर स्टेंट की कीमत कम की थी।

बता दें कि कोरोनरी स्टेंट दिल के दौरे की बीमारी के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। यह पतला तार सरीखा ट्यूब होता है, जिन्हें ब्लॉकेज हटाने के लिए दिल की धमनियों में पहुंचाया जाता है ताकि दिल के दौरे का खतरा कम किया जा सके।

सरकार ने सोमवार को बेअर मेटल स्टेंट (बीएमएस) के दाम 7400 रपए से बढ़ाकर करीब 7600 रुपए कर दिए हैं। दूसरी ओर ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट की कीमत 30,180 रुपए से घटाकर 27,890 रुपए कर दी है। नेशनल फामॉस्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी की अधिसूचना के मुताबिक संशोधित दाम मंगलवार से प्रभावी हो जाएंगे और ये 31 मार्च 2019 तक लागू रहेंगे।

कुछ स्टेंटमेकर्स को निराश कर सकने वाले एक कदम में रेगुलेटर ने तय किया है कि नए लॉन्च किए गए ड्रग इलूटिंग स्टेंट्स के लिए नई सब-कैटेगरी नहीं बनाई जाएगी। एनपीपीए के नोटिफिकेशन में कहा गया कि इस अनुरोध पर विचार करने के लिए हेल्थ मिनिस्ट्री की ओर से विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई थी। जिन्होनें इस पर अलग सब-कैटेगरी बनाने का कोई आधार नहीं पाया क्योंकि एक डीईएस के दूसरे से बेहतर होने का पर्याप्त क्लिनिकल एविडेंस नहीं है। मेडिकल टेक्नोलॉजी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के डायरेक्टर जनरल पवन चौधरी ने कहा कि यह निर्णय निराशाजनक है और इससे मरीज के सामने विकल्प सीमित हो जाएंगे और मार्केट में इनोवेटिव टेक्नोलॉजी की उपलब्धता भी घटेगी।

पेशेंट एक्टिविस्ट ग्रुप ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क की मालिनी ऐसोला ने कहा, ‘इन उपकरणों को भी प्राइस कंट्रोल के दायरे में लाया जाना चाहिए ताकि एंजियोप्लास्टी और एंजियोग्राम जैसे प्रोसिजर की लागत कम हो

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