देवभूमि उत्तराखंड में महादेव का एक ऐसा सिद्धपीठ है, जहां विशेष पर्वों पर अपने आप घंटियों के बजने का चमत्कार होता है। मंदिर के प्रतिनिधि राजेंद्र गिरी कहते हैं कि कई बार उन्होंने और मंदिर पहुंचे श्रद्धालु ने इसे साक्षात महसूस किया है।
महादेव का यह अद्भुत सिद्धपीठ तीर्थनगरी ऋषिकेश में वीरभद्र महादेव के नाम से विख्यात है। मान्यता के अनुसार, शिव की जटा से उत्पन्न उनके गण वीरभद्र ने राजा दक्ष के यज्ञ का विध्वंस किया था। आज भी यह क्षेत्र वीरभद्र के नाम से प्रसिद्ध है।
माना जाता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना अवश्य पूरी होती है। भगवान शिव के रौद्र रूप का प्रतीक यह सिद्धपीठ वीरपुर खुर्द में स्थित है। मंदिर का इतिहास 2000 साल से पुराना बताया जाता है। आज शिवरात्रि के दिन यहां सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना करने पहुंच रहे हैं। पुरातात्विक खुदाई में मिले इस मंदिर के अवशेषों से यह भी ज्ञात हुआ कि इस क्षेत्र में 100 ईसवी में सभ्यता विधमान थी।
जानकार बताते हैं मंदिर परिसर में पूर्व में हुई खुदाई के दौरान पुराने मंदिरों के अवशेष भी मिले हैं। किवदंती है कि विशेष पर्व पर देवता भी यहां पूजन करने आते हैं।इस दौरान मंदिर की घंटियां खुद ब खुद बजने लगती हैं। विशेष पर्व पूर्णमासी, शिव चौदस व अमृत सिद्धि योग के दौरान वीरभद्र मंदिर में देवता भी पूजन करने आते हैं। रंभा नदी के किनारे स्थित इस मंदिर में भक्तों को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। मंदिर के प्रतिनिधि राजेंद्र गिरि का कहना है कि उक्त पर्वों के दौरान कई बार सुबह घंटियां अपने आप बजती हैं। जिसका आभास उस दौरान मंदिर में मौजूद कई श्रद्धालुओं को हुआ है। इसी परिसर में स्थित माता मुंडमालेश्वरी का मंदिर भी दर्शनीय है।
प्राचीन मंदिर में वर्ष भर भक्तों का तांता लगा रहता है। मंदिर को लेकर कई मान्यताएं हैं। मंदिर से जुड़े राजेंद्र गिरि ने बताया कि मंगलवार को रात्रि 10 बजकर 37 मिनट से 14 फरवरी रात्रि 12 बजकर 47 मिनट तक शिवरात्रि रहेगी। इसी अवधि में भक्त मंदिर में दर्शन व जलाभिषेक करेंगे। बताया कि बाजार में उपलब्ध नकली धूप, अगरबत्ती के कारण जन स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है, लिहाजा मंदिर में ऐसी वस्तुओं के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।