संगीत संध्या का शुभारंभ विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान ने किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अपनी सांस्कृतिक विविधता और विशिष्टता के लिए संपूर्ण देश में अपना विशेष स्थान रखता है। स्व. मोहन उप्रेती द्वारा लोक संस्कृति के उत्थान में दिए गए योगदान को उन्होंने प्रेरणादायी बताया।
इस अवसर पर डॉ. डीआर पुरोहित को लोक रंगमंच, ढोल के क्षेत्र में दिए गए उल्लेखनीय कार्य के लिए मोहन उप्रेती लोक संस्कृति सम्मान और लोक गायक माया उपाध्याय को लोक गीत के क्षेत्र में दिए गए योगदान के लिए समिति सम्मान से नवाजा गया।
दोनों लोक कलाकारों को मुख्य अतिथि चौहान ने स्मृति चिन्ह, शॉल और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। चौहान ने इस अवसर पर उत्तराखंड के प्रसिद्ध चित्रकार स्व. बी मोहन नेगी पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका ‘सृजन से’ का भी विमोचन किया।
समिति के अध्यक्ष हेमंत जोशी ने मोहन उप्रेती द्वारा लोक संस्कृति के उत्थान में दिए गए योगदान के बारे में बताया। इससे पहले जय नंदा लोक कला केंद्र, उत्तरांचल पर्वतीय कला केंद्र, उद्यांचल पर्वतीय कला समिति के कलाकारों ने कुमाऊंनी, गढ़वाली नृत्य और लोग गीतों से समां बांधा।
गीत एवं नाट्य प्रभाग के कलाकारों ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ पर नाटक पेश किया। लोक गायिका माया उपाध्याय ने आज का दिना तू होली घर पना, ओ मेरी चंदा तू मेरा चकोर, लाली हो लाली हो लाली, लोक गायिका लता पांडे ने स्वर्गतारा जुनाली राता गीत गाए। गीतों पर दर्शक देर रात तक झूमे। संध्या का समापन बेड़ू पाको बारो मासा गीत से हुआ।
इससे पहले छोलिया नृतक दल ने शहर में सांस्कृतिक जुलूस निकाला। इस अवसर पर मनोज सनवाल, एलके पंत, नमित जोशी, कैलाश पांडे, नवल वर्मा, आलोक वर्मा, चदन बोरा, चंद्रकला भट्ट, उमाशंकर, राजू मनराल, जगदीश जोशी, डा. दीपा जोशी आदि मौजूद थे। संचालन मीना पांडे ने किया।