ऋषिकेश (ब्यूरो)। राज्य सरकार प्राचीनकाल में उत्तराखंड के चारधाम यात्रा पैदल मार्ग को फिर से विकसित करेगी, जिससे राज्य में ट्रेकिंग टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा सके। इसके लिए सरकार की ओर से योजना तैयार की गई है। शुक्रवार को तीर्थनगरी पहुंचे पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि उत्तराखंड की प्राचीन चारधाम पैदल यात्रा 5120 वर्ष पुरानी है। राज्य सरकार ने चारधाम यात्रा ट्रेक को फिर से विकसित करने का निर्णय लिया है। योजना के तहत मार्ग में पड़ने वाली चट्टियों, पड़ावों की तलाश का कार्य शुरू किया जा चुका है। इस योजना के क्रियान्वयन से प्राचीन मार्ग पर पड़ने वाले पर्यटक व तीर्थस्थल, मठ-मंदिर फिर से आबाद होंगे, जिससे राज्य में देसी विदेशी सैलानियों की आमद और अधिक बढ़ जाएगी। यह कदम राज्य में स्वरोजगार व पलायन को रोकने में काफी हद तक मददगार साबित होगा। इसके अलावा उन्होंने बदरीनाथ व केदारनाथ के मध्य रावल ट्रेक, नीती माणा ट्रेक आदि ट्रेकों को भी खोलने पर योजना तैयार करने की बात कही है।
दस्तावेज उपलब्ध कराने वाले होंगे पुरस्कृत
ऋषिकेश। सरकार की चारधाम यात्रा ट्रेकिंग रूट को डेवलप करने के लिए जनसहयोग भी लेगी। इसके लिए प्राचीन मार्ग से जुड़ी जानकारियां व सुझाव देने वाले लोगों को सरकार पुरस्कृत भी करेगी। विभागीय मंत्री ने कहा कि बेहतर जानकारियां उपलब्ध कराने वालों को एक लाख, 51 हजार, 21 हजार व 10 हजार की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। इससे सरकार को प्राचीन चारधाम पैदल यात्रा मार्ग को विकसित करने में काफी हद तक मदद मिलेगी।
नीलकंठ व कुंजापुरी तक बनेगा रोप-वे
ऋषिकेश। राज्य सरकार जल्द तीर्थनगरी से प्राचीन नीलकंठ धाम व सिद्धपीठ कुंजापुरी देवी मंदिर तक रोप-वे योजना का निर्माण करेगी। यदि ऐसा होता है तो इससे जहां नीलकंठ जाने वाले श्रद्धालुओं को आवागमन की सुविधा मिलेगी वहीं प्राचीन कुंजापुरी देवी मंदिर में देसी विदेशी तीर्थयात्रियों की आमद में अप्रत्याशित इजाफा होगा। यहां तीर्थाटन व गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालु मुनिकीरेती से आसानी से प्राचीन नीलकंठ धाम व कुंजापुरी मंदिर के दर्शन को जा सकेंगे। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि घांघरिया से हेमकुंड रोपवे योजना का भी जल्द क्रियान्वयन किया जा रहा है।