अस्थिरता बनाने के प्रयास

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उत्तराखंड के सियासी प्याले में एक बार फिर से उफान आता नजर आ रहा है। कांग्रेस में बगावत करने वाले अब भाजपा में भी बगावत के तेवर दिखा रहे हैं, हालांकि उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी जिस प्रचंड बहुमत में है उसे देख कर लगता नहीं कि इन तेवरों का कोई फायदा मिलने वाला है। जल्द ही त्रिवेंद्र सरकार मंत्रिमंडल का विस्तार भी होना है और तीन नए मंत्री सरकार में शामिल होंगे। संभवत: मंत्री बनने के लिए कुंवर प्रणव चैंपियन लालायित नजर आ रहे हैं। अपनी ही सरकारों का विरोध करना चैंपियन की आदत रही है और इन आदतों में उनका बड़बोलापन भी शामिल हैं। सरकार से नाराजगी की अपनी शिकायत को वे आलाकमान के पास भी ले गए हैं लेकिन उत्त्राखंड में स्थायी सरकार चलाने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए आलाकमान अब चैंिपयन सहित कुछ अन्य विधायकों के पर कतर सकता है। भाजपा के अंदर ही एक अन्य सुगबुगाहट सांसद डा निशंक की चाय पार्टी को लेकर भी है जिसमें कुछ विधायक शामिल हुए थे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत सहित अन्य दर्जनों विधायकों ने इस पार्टी से दूरी बनाए रखी। भले ही खुल कर कोई कुछ बोलने को तैयार न हो लेकिन अंदरखाने इस चाय पार्टी को राजनीतिक अस्थिरता की संभावनाओं से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। सतपाल महाराज का अपना राग चल रहा है और वह अधिकांशत: सरकारी कार्यक्रमों से दूरी ही बनाए रखे हुए हैंं। खासतौर से मुख्यमत्री के कार्यक्रमों में सतपाल महाराज उपस्थित नहीं रहते। यह तमाम हालात बता रहे हैं कि उत्तराख्ांड की भाजपा सरकार में मुख्यंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व को कुछ नेता एवं विधायक पचा नहीं पा रहे हैं। उनके नेतृत्व करने की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं जिसकी शिकायतें कई बार विधायकों द्वारा अमित शाह के पास की गयी है। सतपाल महाराज एवं कुंवर प्रणव चैंिपयन असंतुष्टों की श्रेणी में समझे जा रहे हैं तो वहंी निशंक की चाय पार्टी में कुछ विधायकों का शामिल होना मुख्यमंत्री को परेशान कर सकता है। राजनीति उठापटक एवं गद्दी के लिए कुछ भी कर गुजरने की निशंक की कसमकसाहट किसी से भी छिपी नहीं है, हालांकि फिलहाल उनके इन प्रयासों का कोई परिणाम निकलने वाला नही ंहै लेकिन निशंक की चाय पार्टी में शामिल होने वाले कुछ विधायकों की मंत्री बनने की राह में अवरोध जरूर उत्पन्न हो गया है। मुख्यमंत्री ने भी इस पार्टी में शामिल होने वाले विधायकों को गंभीरता से लिया है, एवं कम से कम तीन नए मंत्रियों को बनाने की सूची से इन विधायकों को बाहर किया जा सकता है। उत्तराख्ांड में पहली बार प्रचंड बहुमत वाली सरकार आई है और प्रदेश की जनता कतई यह नहीं चाहती कि अपने निजी स्वार्थो के लिए नेता सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करें। प्रदेश के विकास में बाधा पैदा करने वाले ऐसे जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भाजपा केन्द्रिय संगठन को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए एवं स्पष्ट करा देना चाहिए कि पहले जनता एवं प्रदेश का हित है, एवं इससे उपर कुछ नहीं।

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