पुरोला (उत्तरकाशी)। उत्तरकाशी जिले के मोरी ब्लॉक का सुदूरवर्ती सावणी गांव अग्निकांड की चपेट में आने से राख के ढेर में तब्दील हो गया। गांव में 39 बहुमंजिले मकान मय सामान जलकर राख होने से 39 परिवार बेघर हो गए। वहीं छह मकान आंशिक रूप से जले हैं। गनीमत यह रही कि सभी ग्रामीण सुरक्षित बच गए, हालांकि अग्निकांड में सौ से अधिक मवेशी जिंदा जल गए। सूचना मिलते ही प्रशासन ने राहत एवं बचाव टीमें गांव में भेज दी है। सड़क से सात किमी की दुर्गम पैदल दूरी पर होने से यहां राहत कार्य में विलंब हो रहा है।
बृहस्पतिवार देर रात करीब एक बजे सावणी गांव में अचानक आग ने एक- एक कर घरों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया। चंद मिनटों में ही आग फैलने से पूरा गांव ध-ूधूं कर धू-धू कर जलने लगा। ग्रामीणों ने बमुश्किल खेतों में भागकर अपनी जान बचाई, लेकिन वह अपने पुश्तैनी घरों, इनमें रखे सामान और मवेशियों को नहीं बचा पाए। अग्निकांड में गांव के 39 बहुमंजिले घर जलकर राख हो एग। हादसे में 50 भेड़-बकरी, 24 गाय, 26 बैल और पांच खच्चर जिंदा जल गए। गांव से हटकर बने जूनियर हाईस्कूल और बेसिक स्कूल के साथ ही कुछ मकान ही स्वाह होने से बच पाए।
अग्निकांड की सूचना मिलते ही डीएम डा.आशीष चौहान ने रात को ही एसडीएम पूरण सिंह राणा के नेतृत्व में राहत सामग्री के साथ गांव में राहत एवं बचाव टीम को रवाना कर दिया। डीएम स्वयं शुक्रवार सुबह अन्य अधिकारियों के साथ सावणी गांव कूच कर गए हैं। अग्निकांड प्रभावितों के लिए टेंट आदि राहत सामग्री भी पहुंचाई जा रही है। फिलहाल बेघरबार लोगों के लिए स्कूल में ठहरने की व्यवस्था की जा रही है। सड़क से सात किमी की दुर्गम पैदल दूरी पर होने से गांव में राहत कार्य में विलंब हो रहा है। गांव में दूरसंचार व्यवस्था भी काम नहीं कर रही है।
अग्निकांड में बेघरबार हुए परिवार
सावणी गांव में हुए अग्निकांड में कृपाल सिंह, सरदार सिंह, कुलदीप, राजी देवी, प्रदीप, सैदर सिंह, जगमोहन, सुबू देवी, सुरेश, किताब सिंह, रणदेव, ज्ञान सिंह, देवेंद्री देवी, मेंबर सिंह, प्रमोद, नेगी सिंह, लायबर सिंह, नत्थी सिंह, गंगा सिंह, सैन सिंह, नाग देवी, शिबी राम, सत्ये सिंह, लक्ष्मण, विनय सिंह, सूरत सिंह, समी देवी, रणवीर, जबरा सिंह, मोती सिंह, खजान सिंह, अवरी देवी, कृपाल एवं जयवीर सिंह कुल 34 परिवारों के घर अग्निकांड में स्वाह हो गए।
राहत में विलंब पर रोष
ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष राजपाल रावत ने भीषण अग्निकांड में पूरा गांव स्वाह होने के बावजूद राहत एवं बचाव कार्य में विलंब पर रोष जताया। कहा कि मेलों में घूमने के लिए तो सरकार के मंत्री हेलीकॉप्टर दौड़ा रहे हैं, लेकिन अग्निकांड पीड़ितों के लिए राहत सामग्री दुर्गम पैदल रास्ते से पहुंचाई जा रही है। सावणी गांव में चार-पांच गर्भवती महिलाएं, कई दुधमुंहे बच्चे और बीमार बुजुर्ग हैं। सर्दी के इस मौसम में सर छिपाने का ठिकाना छिन जाने से इनकी सेहत पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने सरकार से गांव में युद्धस्तर पर राहत अभियान चलाने की मांग की।
मदद के लिए उठे हाथ
जखोल गांव निवासी गुलाब सिंह ने बताया कि सावणी गांव में लगी आग इतनी भयंकर थी कि करीब सात किमी दूर जखोल गांव से भी दिखी। अग्निकांड का पता लगते ही जखोल एवं सटूड़ी गांव से बड़ी संख्या में ग्रामीण सावणी पहुंचे। कहा कि अग्निकांड पीड़ित परिवारों के लिए शीघ्र सर छिपाने का ठिकाना और भोजन व्यवस्था कराना जरूरी है। आसपास के गांवों के लोग भी अपने स्तर से मदद की कोशिश में जुटे हैं। श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम के परियोजना प्रबंधक गोपाल थपलियाल ने बताया कि संस्था की ओर से अग्निकांड पीड़ितों के लिए कंबल, बर्तन आदि जरूरी सामान समेत राहत सामग्री भेज दी गई है।