दुनिया में एक मंदिर ऐसा भी है, जहां पुजारी को भी देवता के दर्शन करने की इजाजत नहीं है। इस मंदिर के कपाट साल में केवल एक दिन खुलते हैं। उस दिन पुजारी भी आंखों पर पट्टी बांधकर पूजा करते हैं।
यह ऐतिहासिक मंदिर चमोली जिले के दूरस्थ गांव वाण में है। यह हिमालय की आराध्य देवी मां नंदा (पार्वती) के धर्मभाई लाटू का मंदिर है। मान्यता है कि मंदिर में साक्षात नागराज अपनी औलोकिक मणि के साथ विराजमान हैं। यही कारण है कि मंदिर के अंदर से दर्शन करने की इजाजत किसी को नहीं है।
वर्ष में एक बार बैशाख मास की पूर्णिमा के मौके पर मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। पुजारी अपनी आंख, नाक और कान को पट्टी से ढ़ककर मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं।
प्रत्येक 12 वर्ष में आयोजित होने वाले हिमालयी महाकुंभ नंदा देवी राज जात का 12वां पड़ाव वाण गांवव में होता है। वाण से लेकर अंतिम पड़ाव होमकुंड तक लाटू ही मां नंदा की आगवानी करते हैं।
मंदिर के भीतर श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति भले ही न होती हो लेकिन बाहर से दर्शनों के लिए हर साल हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। यह ऐतिहासिक मंदिर समुद्र तल से करीब 8500 फीट की ऊंचाई पर एक बड़े देवदार के पेड़ के नीचे बना है।