23 फरवरी से दो मार्च तक होलाष्टक लग रहे हैं। ऐसे में इन आठ दिनों आप भूलकर भी ये काम न करें।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन 8 दिनों में ग्रह अपना स्थान बदलते हैं। ग्रहों के इन बदलाव की वजह से होलाष्टक के दौरान किसी भी शुभ कार्य को शुरू नहीं किया जाता है। होलाष्टक के चलते जहां दो मार्च तक शुभ कार्य बर्जित रहेंगे वहीं खरमास के चलते भी एक माह की अवधि में शुभ कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। ऐसे में लोगों को किसी नए कार्य की शुरुआत एवं विवाह आदि के आयोजन को लेकर ज्योतिषीय परामर्श की जरुरत पड़ेगी
पंडित सुशांतराज के अनुसार, इस बार एक मार्च को होलिका दहन रात 7.42 के बाद हो जाएगा। ज्योतिषाचार्यों ने दहन का यही समय तय किया है। होलाष्टक के बाद 13 मार्च तक विवाह समेत अन्य शुभकार्य किए जा सकेंगे। लेकिन इसके बाद फिर से एक माह के लिए शुभ कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा।
ज्योतिषाचार्य राकेश शुक्ला ने बताया कि 13 मार्च से 13 अप्रैल तक खरमास रहेगा। इस अवधि में शुभ कार्य बर्जित होंगे। उन्होंने बताया कि 17 अप्रैल से शुभ कार्यों का प्रारंभ हो जाएगा। साथ ही इस वर्ष मलमास होने के चलते 15 मई से 15 जून के मध्य भी शुभ कार्य नहीं किए जा सकेंगे। 15 जून के बाद 20 जुलाई तक शुभ कार्यों का मुहूर्त बना रहेगा।
हिंदू धर्म में गर्भवती स्त्री को विशेष सम्मान और संरक्षणदिया जाता है इसलिए उसकी रक्षा के लिए कई तरह के लिए हम भी बनाए गए हैं जिस प्रकार सूर्य और चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्रियों को घर सेबाहर निकलने की मनाही रहती है। उसी तरह होलाष्टक के दौरान भी गर्भवतीस्त्रियों को नदी नाले पार करने की मनाही रहती है।