इस विवाद को लेकर मंच पर भावुक हुए सीएम जयराम ठाकुर, दिया ये बयान

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इस विवाद को लेकर सीएम जयराम ठाकुर मंच पर भावुक हो गए। एसडीएम कार्यालय को लेकर छिड़े विवाद के बीच सीएम जयराम ठाकुर ने पहली बार जंजैहली और बगस्याड़ में जनसभा को संबोधित किया।

सीएम ने कहा कि अब तो उन्हें जिंदाबाद और मुर्दाबाद जैसे नारों की आदत हो गई है। मंच पर भावुक होकर कहा कि एक छोटी सी बात के लिए जंजैहली के लोगों को इतना बड़ा बखेड़ा करने की जरूरत नहीं थी।

वो भी उस वक्त, जब सूबे के इतिहास में पहली बार जिला मंडी और सिराज से किसी को मुख्यमंत्री का गौरव मिला हो। उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान बैठकर होता है और मैं खुलकर निमंत्रण देता हूं कि जंजैहली वालो आओ, मिल-बैठकर समस्या का समाधान करते हैं।

सीएम ने कहा कि कुछ लोग इस मुद्दे को बेवजह तूल दे रहे हैं। जितना वे जंजैहली के लिए कर सकते हैं, उतना कोई दूसरा नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि जंजैहली एसडीएम कार्यालय का फैसला हाईकोर्ट का था न कि उनका।

सीएम ने चुटकी लेते हुए कहा कि मंडी के लोग कह रहे हैं कि जंजैहली वालों मंडी का एसडीएम कार्यालय ले जाओ और हमें मुख्यमंत्री दे दो। ठाकुर ने कहा कि विवाद को बढ़ा रहे लोगों को संयम बरतना चाहिए।

उन्हें अपने सिराज के लोगों की बहुत याद आती है। जिनसे मिलने के लिए वे दो दिवसीय दौरे पर सिराज आए हैं। इस मौके पर सांसद राम स्वरूप शर्मा ने भी कहा कि जंजैहली के लोगों को इस छोटी सी मांग को लेकर इतना बड़ा आंदोलन करने की जरूरत नहीं थी।

इस मौके पर सिराज भाजपा मंडल अध्यक्ष शेर सिंह ठाकुर, महामंत्री भीष्म ठाकुर आदि मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा है कि 46 हजार करोड़ के ऋण में दबी सरकार ने अपने महज दो माह के कार्यकाल में ऐतिहासिक बजट प्रस्तुत किया है।

विपक्ष ने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि चंद दिनों के कार्यकाल को पूरा करने वाली जयराम सरकार ऐसा बजट पेश करेगी। सीएम सिराज में जनसभाओं में बोल रहे थे। उन्होंने 2018-19 के बजट को चमत्कारी बजट करार दिया।

उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी बजट को सराहा है। बजट में हर वर्ग का ख्याल रखा गया है। मुख्यमंत्री के साथ सिराज दौरे पर उनकी धर्मपत्नी डॉ. साधना ठाकुर भी साथ रहीं।

सीएम ने गृह क्षेत्र के दौरे के दौरान पक्ष-विपक्ष दोनों तरफ निशाना साधा। अपने संबोधनों में उन्होंने कहा कि हिमाचल में नई सरकार नया करने की ओर बढ़ रही है।

लाल और हरी हिमाचली टोपी की राजनीति खत्म कर दी गई है।। निचला हिमाचल ऊपरला का हिमाचल का मुद्दा भी बंद हो गया है। बिना मूंछ वाले सीएम का चैप्टर भी क्लोज कर दिया है।

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