समुद्र तल से 10,990 फीट की ऊंचाई पर स्थित गर्ब्यांग में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवान अब डब्बाबंद सब्जियों की जगह खुद की उगाई सब्जियों का सेवन करेंगे। ऐसा संभव हो पाया है आईटीबीपी के जमीन के भीतर क्यारी बनाकर सब्जी पैदा करने के सफल प्रयोग से। बर्फ और पाले के बीच सब्जियों की पैदावार से आईटीबीपी के अधिकारी काफी उत्साहित हैं। अधिकारियों की माने तो अग्रिम चौकियों में भी इस तरह की भूमिगत क्यारी तैयार कराई जाएंगी। इसके अलावा यदि गर्ब्यांग समेत आसपास के गांव के लोग इस तकनीक से सब्जी उत्पादन करना चाहेंगे तो आईटीबीपी उनकी मदद करेगी।
गर्ब्यांग में अक्तूबर के बाद ठंड शुरू हो जाती है। पाला और बर्फ गिरने से जमीन की सतह पर किसी तरह की वनस्पति पैदा कर पाना संभव नहीं होता। शीतकाल में अग्रिम चौकियों में तैनात जवानों को डिब्बाबंद सब्जी भेजनी पड़ती थी। ताजा और हरी सब्जी जवानों को कभी नहीं मिल पाती थी। आईटीबीपी के उपमहानिरीक्षक एपीएस निंबाडिया ने बताया कि गर्ब्यांग में भूमिगत सब्जी उत्पादन का प्रयोग सफल हुआ है।
अब गुंजी, कालापानी, कुटी, ज्योलिंगकांग स्थित अग्रिम चौकियों में भी इसी विधि से सब्जी तैयार की जाएगी। आईटीबीपी सातवीं वाहिनी के सेनानी महेंद्र प्रताप ने बताया कि जमीन के अंदर सब्जी पैदा करने के लिए बनाई गई क्यारी को ग्रीनहट नाम दिया गया है। इसकी देखरेख आईटीबीपी के जवान खुद करते हैं।
भूमिगत क्यारी में ऐसे तैयार होती हैं सब्जियां
आईटीबीपी ने गर्ब्यांग अग्रिम चौकी में सब्जी उगाने के लिए पहले चार फुट गहरा गड्ढा तैयार किया। इस गड्ढे को एक गुणा एक मीटर की लंबाई-चौड़ाई दी गई। उसमें सब्जी बीजों का रोपण करने के बाद गड्ढे को पॉलीहाउस की तरह चारों ओर से बंद कर दिया गया। जमीन के अंदर का तापमान अपेक्षाकृत अधिक होता है। खुली सतह में पाला, बर्फ जो नुकसान पहुंचाती है उसका असर जमीन के अंदर नहीं दिखता। आईटीबीपी के महानिरीक्षक पुनीत रस्तोगी ने बताया कि जमीन के अंदर सब्जी पैदा करने में सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि जमीन के अंदर गोभी, पालक, धनिया, राई जैसी सब्जियां तैयार हैं।