किच्छा रोड स्थित बागवाला में स्वतंत्रतासंग्राम सेनानी राम अवध सिंह को सरकार ने 50 एकड़ जमीन आवंटित की थी। राम अवध की मौत के बाद 32 एकड़ जमीन उनकी बेटी प्रभावती के नाम हो गई थी। बची हुई 18 एकड़ जमीन सीलिंग में आ गई थी। प्रभावती का आरोप था कि यूपी के बरहज के पूर्व विधायक प्रेमप्रकाश सिंह ने परिजनों के साथ मिलकर कागजों में हेराफेरी कर जमीन को अपने नाम करा लिया था।
पुलिस ने वर्ष 2014 में प्रेमप्रकाश सिंह, प्रेमनारायण सिंह और नवनाथ तिवारी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने जांच में प्रेमप्रकाश सिंह की पत्नी और सितारगंज की ब्लॉक प्रमुख मंजूलता सिंह, पुत्रवधू निधि सिंह, बेटे शिव वर्धन सिंह, जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व स्वतंत्र बहादुर सिंह, उनकी पत्नी गीता सिंह और पुत्रवधू शिखा सिंह के नाम मामले में जोड़ दिए थे।
वर्ष 2016 में पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। मामले में प्रेमप्रकाश, मंजूलता, निधि, शिववर्धन, प्रेम नारायण, नवनाथ को जेल में रहना पड़ा था। सोमवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राहुल श्रीवास्तव की अदालत में सभी नौ आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 467,468,471,504,342 और 120 बी में आरोप तय किए गए। कोर्ट में नवनाथ तिवारी को छोड़कर बाकी आठ आरोपी मौजूद थे। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ उक्त धाराओं में कोर्ट में ट्रायल चलेगा।