Under-19 World Cup: उत्तराखंड के भरोसे भारत का पलड़ा आस्ट्रेलिया पर भारी, जानिए कैसे?

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अंडर-19 विश्व कप इतिहास की बात करें तो भारत का पलड़ा भारी है। अब एक बार फिर भारत और आस्ट्रेलिया फाइनल में आमने-सामने हैं।

जी हां, विश्व कप इतिहास में भारत का पलड़ा 3-2 से भारी है। भारत और आस्ट्रेलिया अंडर-19 वर्ल्डकप में अब तक पांच बार आमने-सामने आए, इनमें से 2012 का फाइनल समेत भारत ने तीन मैच जीते, जबकि आस्ट्रेलिया को दो जीत नसीब हुई। इस विश्व कप में भी भारत लीग मैचों में आस्ट्रेलिया को 100 रनों से शिकस्त दे चुका है।

अब एक बार फिर भारत और आस्ट्रेलिया फाइनल में आमने-सामने हैं। भारतीय टीम को कमलेश नगरकोटी, मावी, इशान पावेल, शुभमन गिल और कप्तान पृथ्वी शाह से काफी उम्मीदें हैं।

29 फरवरी 1988 को पहली बार भारतीय टीम अंडर 19 विश्व कप में आस्ट्रेलिया के सामने थी, जिसमें आस्ट्रेलिया ने उसे सात विकेट से शिकस्त दी। इसके 10 साल बाद हुए दूसरे अंडर-19 वर्ल्ड कप में भी भारत की किस्मत नहीं बदली और आस्ट्रेलिया से उसे छह विकेट से हार का मुंह देखना पड़ा।

2000 में जब भारत और आस्ट्रेलिया का आमना-सामना हुआ तो भारतीय खिलाड़ियों ने कंगारुओं को 170 रनों के विशाल अंतर से हराया। 2012 के फाइनल में एक बार फिर भारत का आस्ट्रेलिया से सामना हुआ। मैच में उत्तराखंड के पिथौरागढ़ निवासी उन्मुक्त चंद की 111 की कप्तानी पारी की बदौलत दो ओवर पहले ही भारत ने कंगारुओं के मुंह से वर्ल्डकप छीन लिया।

2018 वर्ल्डकप के लीग मैच में भारत ने पहले खेलते हुए 328 रनों का विशाल लक्ष्य रखा था। जवाब में आस्ट्रेलियाई टीम 228 रनों पर ढेर हो गई। इस मैच में उत्तराखंड के कमलेश नगरकाटी ने सात ओवर में 29 रन देकर तीन विकेट झटके थे। इस मैच में भी भरतीय टीम की उम्मीदें उनपर टिकी हैं। मैच में एक और उत्तराखंडी आर्यन जुयाल ने भी विकेट के पीछे शानदार प्रदर्शन किया था। हालांकि बाकी मैचों में उन्हें टीम में जगह नहीं मिली।

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