अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर वर्ल्ड चैंपियन का ताज अपने सिर सजा लिया है। सलामी बल्लेबाज मनजोत कालरा की 101 रन की शतकीय पारी की बदौलत टीम इंडिया ने कंगारुओं को 8 विकेट से हराया। फाइनल मुकाबले में मनजोत की शानदार शतकीय पारी के लिए उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया। वहीं सीरीज में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शुभमन गिल को मैन ऑफ द सीरीज के खिताब से सम्मानित किया गया।
बता दें कि अंडर-19 विश्वकप में टीम इंडिया की तरफ से खेलने वाले कई खिलाड़ियों की तुलना दिग्गजों से की जा रही है। इन खिलाड़ियों की न सिर्फ चाल-ढाल बल्कि बल्लेबाजी और गेंदबाजी करने का स्टाइल भी हू-ब-हू दिग्गजों जैसा है। ये हैं नए जमाने के युवराज, विराट और सचिन।
फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को चारों खाने चित करने वाले सलामी बल्लेबाज मनजोत कालरा की तुलना टीम इंडिया के धाकड़ ऑलराउंडर युवराज सिंह से की जाती है। कवर ड्राइव लगाते वक्त मनजोत कालरा युवराज सिंह की याद दिलाते हैं।
अंडर-19 वर्ल्ड कप 2018 में मैन ऑफ द सीरीज हथियाने वाले शुभमन गिल ने सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ लाजवाब शतक लगाया था। फैंस की मानें तो इस खिलाड़ी के तेवर टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली जैसे हैं। मैदान पर उनकी आक्रामकता और शॉट सिलेक्शन के आधार पर उनकी तुलना कप्तान विराट कोहली से की जाती है।
अंडर-19 लेवल पर टीम इंडिया को चौथी बार वर्ल्ड चैंपियन बनाने वाले कप्तान पृथ्वी शॉ मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर की कार्बन कॉपी हैं। बैकफुट पर लगाए हुए पृथ्वी के सभी शॉट महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर की याद दिलाते हैं।
बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज अनुकुल रॉय को समस्तीपुर (बिहार) का रवींद्र जडेजा कहा जाता है। उनके बॉलिंग एक्शन से लेकर फील्डिंग करने का तरीका हू-ब-हू टीम इंडिया के ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा जैसा है।
अंडर-19 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का हिस्सा रहे अर्शदीप सिंह ने इस मेगा टूर्नामेंट में शुरुआती दो मैच ही खेले थे। इस प्रतिभाशाली गेंदबाज का बॉलिंग एक्शन ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क जैसा है।
पृथ्वी शॉ के नेतृत्व वाली टीम इंडिया ने शनिवार को अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से मात देकर चौथी बार विश्व चैंपियन बना। न्यूजीलैंड के माउंट माउंगानुइ में खेले गए इस मुकाबले में कंगारू टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 216 रन पर ही ढेर हो गई।
217 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया ने इसे सिर्फ 39 ओवर में ही हासिल कर लिया। भारत की इस धमाकेदार जीत के मुख्य हीरो रहे दिल्ली के मनजोत कालरा। उन्होंने इस दवाब वाले मुकाबले में 102 गेंदों पर 101 रन की नाबाद पारी खेली। इसके अलावा भी कई ऐसे खिलाड़ी रहे, जिसके योगदान के बिना शायद भारत यह चौथी बार चैंपियन न बन पाता। आइए जानते हैं उन 5 कारणों के बारे में जिसकी वजह से भारत बना विश्व विजेता…
टीम इंडिया की इस जीत का सबसे बड़ा कारण उसके गेंदबाज रहे। इस मैच में पृथ्वी शॉ द्वारा लगाए सभी पांचों गेंदबाजों को सफलता मिली। ईशान पोरेल, शिवा सिंह, अनुकूल रॉय ओर कमलेश नागरकोटी ने दो-दो विकट झटके जबकि शिवम मावी को एक विकेट मिला। इन गेंदबाजों ने लगातार अंतराल पर कंगारू बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा, जिसके कारण वह बड़ा स्कोर खड़ा करने पाने में नाकाम रहे।
टीम इंडिया को यह मैच जीतने के लिए मजबूत शुरुआत की जरुरत थी। इस काम को कप्तान पृथ्वी शॉ और मनजोत कालरा ने बखूबी किया। हालांकि शॉ 29 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन कालरा एक छोड़ पर अंत तक टिके रहे और नाबाद 101 रन की पारी खेली। कालरा को उनकी इस पारी के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया।
कालरा के साथ विकेटकीपर बल्लेबाज हार्विक देसाई ने टीम इंडिया को मजबूत प्रदान की और अंत तक कोई विकेट नहीं गिरने दिया। पृथ्वी शॉ के आउट होने के बाद उप-कप्तान शुभमन गिल तेजी से रन बनाने के चक्कर में 31 के निजी स्कोर पर उपल की गेंद पर क्लीन बोल्ड हुए। इसके बाद आए देसाई ने धैर्य से खेलते हुए नाबाद 47 रन बनाए।
कंगारू टीम की कमजोर गेंदबाजी और फील्डिंग भी टीम इंडिया की जीत का मुख्य कारण बना। ऑस्ट्रेलिया के कई फील्डरों ने न सिर्फ इस मैच में कैच छोड़े बल्कि रन आउट करने के भी मौकों को गंवाया। उनकी कमजोर गेंदबाजी के सामने कोई भी भारतीय बल्लेबाज कभी परेशानी में नजर नहीं आया।
टीम इंडिया की इस जीत का सबसे बड़ा कारण राहुल द्रविड की मेहनत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। बीते 9 महीनों से द्रविड की टीम को तैयार कर रहे थे, जिसका फल उन्होंने आज मिला।
टीम इंडिया के युवा ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर को रोटरी क्लब मद्रास ने ‘यंग अचीवर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। यह अवार्ड उन्हें उनकी उपलब्धियों के लिए दिया गया है।
गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में टीम इंडिया के लिए वन-डे और टी-20 में डेब्यू करने वाले सुंदर को हाल में आईपीएल नीलामी में रायल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने 3.2 करोड़ रुपये में खरीदा है।
सुंदर ने पुरस्कार समारोह में अपने करियर में विभिन्न विभागों में उनका सहयोग करने वाले लोगों का आभार व्यक्त किया। साल 2017 दिसंबर में श्रीलंका के खिलाफ मोहाली वन-डे में तमिलनाडु के इस युवा ऑलराउंडर ने अपना डेब्यू किया था। वह आईपीएल में पुणे सुपरजायंट्स से भी खेल चुके हैं।
बता दें कि तमिलनाडु के रहने वाले सुंदर सबसे कम उम्र में टीम इंडिया की ओर से वन-डे में डेब्यू करने वाले दूसरे खिलाड़ी हैं। उन्होंने साल 2017 में श्रीलंका के खिलाफ वन-डे में अपना डेब्यू मैच खेला था। सुंदर ने महज 18 साल 69 दिन में इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था।
इससे पहले वन-डे में सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ी में पार्थिव पटेल का नाम आता है। पार्थिव ने 2003 में 17 साल 301 दिन में वन-डे में डेब्यू किया था। बता दें कि सुंदर ने अभी तक के करियर में एक वन-डे और एक टी-20 मैच खेले हैं, जबकि 11 आईपीएल मैच खेले हैं।