एसटीएफ और पुलिस की टीम ने अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त का भंडाफोड़ कर तीन सेमी ऑटोमेटिक पिस्टलों के साथ एक तस्कर को धर दबोचा है। यूपी का एक तस्कर एक पिस्टल लेकर मौके से भागने में सफल रहा, जिसकी धरपकड़ के लिए दबिश दी जा रही है। एसटीएफ के निरीक्षक एमपी सिंह ने बताया कि बरामद पिस्टलों की कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये है। बता दें कि उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड के नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिले में अवैध हथियारों की सप्लाई का बड़ा खेल चलता है।
शनिवार को उत्तराखंड एसटीएफ की प्रभारी रिद्धिम अग्रवाल के निर्देश पर कुमाऊं एसटीएफ की टीम यहां पहुंची। टीम ने मुखबिर की सूचना पर कोतवाल योगेश चंद्र उपाध्याय और अन्य पुलिस कर्मियों के साथ चीकाघाट गांव के पास घेराबंदी की। यहां मलपुरी गांव का हरप्रीत सिंह संधू उर्फ जोधा नानकपुरी टांडा थाना शीशगढ़ (बरेली) निवासी मनदीप सिंह के साथ अवैध हथियारों का सौदा कर रहा था। टीम ने हरप्रीत को तो धर दबोचा, लेकिन मनदीप सिंह एक पिस्टल लेकर फरार हो गया।
हरप्रीत के पास से 32 बोर के तीन सेमी ऑटोमेटिक पिस्टल बरामद हुए। पुलिस ने तस्करी में प्रयुक्त बिना नंबर की स्विफ्ट कार भी जब्त की है। पकड़े गए आरोपी को शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत जेल भेज दिया गया है। एसटीएफ निरीक्षक एमपी सिंह ने बताया कि पूछताछ में हरप्रीत ने खुलासा किया कि वह और मनदीप ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिले में रईसजादों को पिस्टल ऊंचे दाम पर बेचा करते हैं।
उन्होंने बताया कि हरप्रीत को वर्ष 2012 में भी यहां की पुलिस ने अवैध शस्त्रों के साथ पकड़ा था। बताया कि फरार मनदीप की धरपकड़ के लिए दबिश दी जा रही है। पिछले 15 दिनों से दोनों तस्कर एसटीएफ के टारगेट पर थे और शनिवार को खरीद-फरोख्त से पहले ही एक को गिरफ्तार कर लिया गया। टीम में कोतवाल योगेश चंद्र उपाध्याय, एसएसआई बीएस बिष्ट, एसटीएफ के उप निरीक्षक विकास चौधरी, आरक्षी गोविंद सिंह, सुरेंद्र सिंह, किशोर कुमार, महेंद्र गिरी, दुर्गा सिंह, कांस्टेबल जगदीश लोहनी, चालक सलमान आदि थे।
बरामद पिस्टल से आठ बार होती है फायरिंग
सितारगंज। आरोपी हरप्रीत सिंह संधू से बरामद तीनों सेमी ऑटोमेटिक पिस्टलों से लगातार आठ फायर हो सकते हैं। इनको एक बार कॉक करने पर आठ बार रैपिड फायर किए जा सकते हैं। ब्यूरो
रामपुर और बरेली जिले में बनती हैं पिस्टल
सितारगंज। अवैध तमंचों के बाद अब रईसजादों में पिस्टल रखने का क्रेज बढ़ा है। एसटीएफ के निरीक्षक एमपी सिंह ने बताया कि पकड़े गए तस्कर से पूछताछ में यह भी सामने आया कि रामपुर और बरेली के बहेड़ी क्षेत्र में ही इन पिस्टलों को बनाया जाता है। वहां से वह 25 से 30 हजार रुपये में एक देसी पिस्टल खरीदते हैं और फिर उत्तराखंड में लाकर उन्हें ऊंचे दाम पर बेच दिया जाता है।