तीर्थनगरी में गंगा तटीय इलाकों की सैर करने के लिए करोड़ों की लागत से बने आस्थापथ का लाभ साल भर में पड़ने वाले पर्व-त्योहारों व कुंभ-कांवड़ मेले मेें गंगा स्नान, तीर्थ दर्शन को उमड़ने वाले श्रद्धालुओं को नहीं मिल पा रहा है। वजह ऋषिकेश क्षेत्र में बने आस्थापथ को मुनिकीरेती से जोड़ने के लिए चंद्रभागा नदी पर प्रस्तावित स्टील गार्डर ब्रिज वर्षों बाद भी नहीं बन पाया है। ऐसे में पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को शहर के बीचोंबीच संकरी सड़क पर अतिक्रमण और जाम की समस्या से जूझते हुए यात्रा करनी पड़ती हैं। अब सिंचाई विभाग ब्रिज की वित्तीय मंजूरी के लिए अर्द्घकुंभ मेला प्रशासन से टकटकी लगाए हुए है।
गौरतलब है कि सिंचाई विभाग ऋषिकेश व मुनिकीरेती द्वारा तैयार किए गए बैराज से त्रिवेणीघाट और चंद्रेश्वरनगर से मुनिकीरेती शत्रुघ्न मंदिर घाट तक तीर्थनगरी के आस्थापथ को जोड़ने के लिए चंद्रभागा नदी पर 85 मीटर स्पान का स्टील गार्डर ब्रिज प्रस्तावित किया गया था। आस्थापथ के बनने के छह साल बीतने के बाद भी उक्त ब्रिज का निर्माण नहीं हो पाया है। इसके प्रस्तावित स्टील गार्डर ब्रिज को आज तक राज्य सरकार की मंजूरी नहीं मिल पाई है, जबकि सिंचाई विभाग ऋषिकेश सब डिवीजन की ओर से वर्ष 2010-11 से अब तक कई मर्तबा इसका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जा चुका है। हाल में सिंचाई विभाग की ओर से 85 मीटर स्पान के स्टील गार्डर ब्रिज का 5.75 करोड़ का प्रस्ताव आगामी अर्द्घकुंभ मेला प्रशासन को भेजा है।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
चंद्रेश्वरनगर निवासी बलराम शाह, मुनिकीरेती के सुरेंद्र भंडारी, सुरेंद्र दत्त भट्ट, बीएस रावत आदि का कहना है कि आस्थापथ को जोड़ने के लिए चंद्रभागा नदी पर प्रस्तावित ब्रिज का निर्माण होना चाहिए, इससे अक्सर अतिक्रमण व यातायात दबाव के कारण बदरीनाथ हाईवे पर लगने वाले जाम से पैदल यात्रियों और स्थानीय लोगों को ऋषिकेश, मुनिकीरेती के मध्यम आवागमन की सुविधा मिलेगी।
क्या कहते हैं अधिकारी
विभाग की ओर से आस्थापथ को जोड़ने के लिए सरकार को करीब छह साल से स्टील गार्डर ब्रिज के कई प्रस्ताव भेजे गए, मगर वित्तीय मंजूरी नहीं मिल पाई। अब इस योजना को अर्द्घकुंभ में प्रस्तावित किया गया है। यदि मंजूरी मिलती है तो चंद्रभागा नदी पर ब्रिज का निर्माण किया जाएगा। जिससे शहर में भीड़भाड़ के समय पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को बैराज से मुनिकीरेती तक आवागमन की सुविधा मिल सके। – डीके सिंह, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग, देहरादून।