भक्ति का नाम समर्पणः सुशीला रावत 

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देहरादून,  सन्त निरंकारी मण्डल के तत्वावधान में देहरादून में हरिद्वार बाइपास में आयोजित रविवारीय सत्संग में प्रवचन करते हुए ज्ञान प्रचारक बहन सुशीला रावत ने कहा कि अभी-अभी सभी ने सौहार्दपूर्ण, एकता एवं पावन पर्व होली का त्यौहार अपने-अपने तरीके से मनाया। जिसे भक्त प्रह्लाद की असीम भक्ति की याद में मनाया जाता है। हमें सद्गुरू ने प्यार सत्कार का ऐसा रंग चढ़ाया जिसमें गुरसिख हर वक्त, हर पल, हर समय ज्ञान रूपी रंग में नहाया होता है। हमें ब्रह्मज्ञान से ज्ञानरूपी गंगा से फूलों की खूशबू, गंगा की निर्मलता का आभास होता रहता है और हम सदैव सत्य के मार्ग पर चलते जाते है।
इस अवसर पर विकास बिहानिया ने कविता के माध्यम से अपनी भावना रखी। उन्होंने कहा कि मानवता के मोती से ही मानव का श्रृंगार करें हम कमल हृदय का खिल जाये तो जीवन सदाकार करें हम अज्ञान अन्धेरा फैला जग में इससे ना घबराये हम अन्धयारा खुद मिट जायेगा ज्ञान के दीप जलाये हम,उच्चे-उच्चे बोल बोलकर कर्म के कभी हम तोले ना किरदार अगर बन जाये ऊंचा गुरूमत से सुधार करें हम।
उन्होंने कहा कि सद्गुरू की कृपा से हम सत्य के मार्ग पर चले। जग न जाने भक्ति क्या है हरि को पाना भक्ति है। छोड़ के सारे रगड़े झगडे गुरू रिझाना भक्ति है। भक्ति जीवन में समर्पण से आती है। जबतक हम गुरू के प्रति समर्पण नहीं करते हमारे मन के भ्रम दूर नहीं होते, भ्रमों को दूर करने के लिये सद्गुरू हमें ज्ञान की रोशनी देता है जिसे हमें संसार में जीवन जीने का सलीका मिलता है। हमारे हृदय में दया करूणा नम्रता प्रेम मिल वर्तन के गुणों की उत्पत्ति होती है। भक्ति हमें जीवन में सद्भाव, सद्गुणों की उत्पत्ति करती है। सन्त महात्माआंे के बीच में बैठकर हमें ज्ञान और परमात्मा पर यकीन आता है। जिससे हमारा विवेक जागृत होता है। सत्संग समापन से पूर्व अनेकों सन्तों-भक्तों, प्रभु प्रेमियों ने गीतों, प्रवचनों द्वारा संगत को निहाल किया। मंच संचालन अमीर चन्द सत्यार्थी ने किया।

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