कई मौतों के राज से नहीं हटा पर्दा

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 हल्द्वानी। जिले में हत्या, आत्महत्या, हादसे और संदिग्ध हालात में मौतों के राज कई लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता हैं, लेकिन नैनीताल पुलिस ऐसे 400 से ज्यादा मामलों को 4 सालों से दबाकर बैठी है।
पुलिस ने सुशीला तिवारी अस्पताल और नैनीताल जिले में संदिग्ध हालात में मरने वाले या हत्या आदि में 400 से ज्यादा शवों की बिसरा रिपोर्ट चार साल से फॉरेंसिक जांच के लिए भेजी ही नहीं। इस कारण इन मौतों का राज हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस के एक कमरे में दफन हो चुका है।
संदिग्ध हालात में हुई मौतों का पुलिस सरकारी डाक्टरों की मदद से पोस्टमार्टम (पीएम) कराकर शव से निकले बिसरे को जांच के लिए देहरादून, लखनऊ, चंडीगढ़ आदि फॉरेंसिक लैब भेजती है। ताकि मौत की सटीक वजह का पता चल सके। इसी रिपोर्ट के आधार पर केस का खुलासा या फाइनल रिपोर्ट लगती है। कई दफा जांच रिपोर्ट आने के बाद पूरे केस की तस्वीर तक उलट जाती है। लेकिन नैनीताल पुलिस 400 बिसरे की अहम जांच को मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस के एक कमरे में पॉलीथीन में रखकर भूल चुकी है।
क्या है बिसरा
जब पोस्टमार्टम में मौत का खुलासा नहीं होता है तो डाक्टर शव से उसका अमाशय, आंत, लीवर, किडनी, ब्लड, तिल्ली आदि निकाल लेता है। बिसरे को संरक्षित कर उसे पुलिस को सौंप देती है। फारेंसिक लैब में जांच के बाद मौत के कारणों का खुलासा होता है। जहर खाने से हुई मौत, आग से जलने के बाद मौत, सड़क दुर्घटना में मौत, गलत इंजेक्शन या दवा देने से मौत, अचानक हुई मौत
हल्द्वानी मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ.सीपी भैसोड़ा ने बताया कि बिसरे के चलते मोर्चरी का एक कमरा गैरजरूरी रूप से घिरा हुआ है। मामले में एसएसपी को पूर्व में कई पत्र लिखे जा चुके हैं लेकिन बिसरा हटाना दूर उनका जवाब तक नहीं आता है। एक बार फिर से रिमाइंडर भेजे जाने की तैयारी है।
नैनीताल के एसएसपी जंमेजय खंडूरी कहा कि बिसरा के मेडिकल कालेज से निस्तारण का कोई पत्र नहीं मिला है। जो भी मामले संदिग्ध होते हैं पुलिस उन्हें तुंरत फॉरेंसिक लैब भेजकर जांच रिपोर्ट प्राप्त करती है। इन बिसरा में भी कोई ऐसा मामला होगा तो दिखवाया जाएगा।

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